पीएमबी लखनऊ। विवेचना में नाम निकालने के लिए दो लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए महानगर थाने की पेपर मिल चौकी के दरोगा धनंजय सिंह की जमानत अर्जी को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने खारिज कर दिया है।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से एडीजीसी महेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वादी प्रतीक गुप्ता ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन थाने में 24 अक्टूबर को शिकायत की थी वह ब्रिटिश स्कूल ऑफ़ लैंग्वेज का संचालक है। उसकी संस्था में प्राची मिश्रा नाम की महिला 2 साल से कम कर रही थी लेकिन वह काम करने की जगह रील बनाती रहती थी लिहाजावादी ने प्राची को कम से निकाल दिया।
बताया गया है कि इससे नाराज होकर प्राची ने चार महीने के बाद षड्यंत्र किया और वादी तथा रियाज अहमद के नाम से 9 सितंबर को महानगर थाने में बलात्कार का फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। आगे कहा गया इस मामले में विवेचन धनंजय सिंह ने रिश्वत लेकर रियाज का नाम निकाल दिया जबकि वादी ने पैसा नहीं दिया तो वादी को जेल भेज दिया। शिकायत में कहा गया की वादी जब अपनी जमानत कराकर जेल से बाहर आया तो विवेचन लगातार वादी से मुकदमे से नाम निकालने के लिए दो लाख की रिश्वत की मांग कर रहा था। वादी की इस शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण की टीम ने आरोपी दारोगा धनंजय सिंह को पेपर मिल चौकी के अंदर से दो लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
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